Bhairav Ashtami on 25th November 2013

Bhairav Ashtami on 25th November 2013

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भैरव अष्टमी विशेष-

इस बार २५ नवम्बर २०१३ को भैरव अष्टमी का पर्व है, भैरव शिव के ही रूप है, भैरव के ही स्वरुप करीब सभी लोगो के कुल देवता भी होते है, मुख्यतः भैरव ८ प्रकार के बताये गए है, भैरव काल से परे है और मुख्यतः उग्र स्वाभाव वाले और शत्रु नाश करने वाले माने जाते है, इनका निवास स्थान शमशान है, भैरव सेनापति की भूमिका निभाते है जहा महाकाल अर्थात महादेव राजा है वही पर भैरव सेना पति के रूप में विराजमान है, भैरव जी को पूजने से उनके आशीर्वाद से शत्रु नाश होता है, कोर्ट कचहरी में विजय प्राप्त होती है, भय का नाश होता है, इत्यादि…
भैरव बहुत ही तीव्र देव है इनका आह्वाहन तंत्र में के अंतर्गत देवी साधनाओ में भी किया जाता है साथ ही साथ इनकी शक्ति इतनी तीव्र और भयंकर होती है जो एक बार चल जाने पर शत्रु का सर्वनाश कर देने का दम रखती है, इनकी शक्ति कभी माफ नहीं करती, भैरव स्वभावतः बहुत ही उग्र रहे है साथ ही, कई सिद्धियो के दाता भी माने गए है.. भैरव जी को पूजने से जन्मो जन्मो के घोर कष्ट और दोष बहुत तीव्रता से दूर हो जाते है.. आप लोग भी भैरव जी को प्रसन्न करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करे..

भैरव अष्टमी पर संध्या या रात्रि में नहा कर साफ़ कपडे पहन कर, भैरव मंदिर जाये, कोशिश करे के मंदिर जाने और वापस आने तक किसी से अधिक बात ना करे और दर्शन के बाद सीधे अपने घर पर ही वापस आये, “ओम श्री काल भैरवाय नमः” का मानसिक जाप करते हुए भैरव जी को आप वस्त्र, २ अगरबत्ती, धुप, दीप, नारियल, मिठाई (विशेषतः जलेबी या इमरती), और जल अर्पित कर सकते है. भैरव जी के सामने उक्त सामग्री अर्पित करने के पश्चात उनसे हाथ जोड़ कर अपने रोग, ऋण, दोष, और व्याधियो को दूर करने की प्रार्थना करे, उनसे अपने और अपने परिवार की रक्षा और कल्याण की प्रार्थना करे…
काल भैरव आप सभी का कल्याण करे और आपके रोग दोष दूर करे.

जय महाकाल

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